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Sunday, May 05, 2013

String of love


This pic was captured by me few days back. If you can guess, let me know what I have tried to show by this  pic. As a hint I would like you to look at the few lines about the instrument.

Oh instrument, oh instrument
you tie our hearts
then we forget the enmity
then we care for feelings
and respect the dignity
such is your enigma
such is you string of love.

Oh instrument, oh instrument
you have the power
that no one can fence
though we cannot see it
its impact is intense
such is your persona
such is you string of love.

Friday, March 02, 2012

ME AND MY SAVAARI

Me with my love, my priced possession, my car. No need to guess which model is this. Just focus upon the nice click taken by my Corby. This pic in the black and white shade gives an astonishing beauty to this pic.

Friday, January 27, 2012

एक नयी सुबह को करें सलाम

उन बातों को हम भूल गए 
जिन बातों से तकरार बढ़ी 
उन दीवारों को तोड़ गए 
जो सबके थी बीच खड़ी
कब तक रखें उन बातों को 
छुपा के अपने दिल में हम 
जिनसे हम कोसों दूर रहे 
जिसने की सबकी आँखें नम

क्या खोया सब भूल के हम 
लें एक दूजे की बाहें थाम 
भुला के सारी नफरत को 
एक नयी सुबह को करें सलाम 

जो लड़े कभी हम मजहब पे 
एक दूजे का खून बहा 
धरती रोई फिर सदियों तक 
कल जो ये लहू लुहान रहा 
जो पास थी अपने वो दौलत 
उसकी न हमको कदर रही 
उनसे हम दिलों को जीत सकें 
ऐसी न हमको खबर रही 

ढूढ़ के लायें वो दौलत  
चाहो हो जो भी अंजाम  
भुला के सारी नफरत को 
एक नयी सुबह को करें सलाम 

Wednesday, August 03, 2011

सरहद पे खड़ा सिपाही है.


सबके मन में खुशहाली है, जब कदम टिके हैं रेतों में,
निगेहबान सरहद पे वो तो, है हरियाली खेतों में.
तिरंगे की वो आन बचाता, आज़ाद हिंद का राही है,
धरती अपनी महफूज़ सदा जब, सरहद पे खड़ा सिपाही है.

बर्फ जमी है धरती पे, फिर भी वो कदम न हिलते हैं,
दुश्मन को जब मार गिराएं, तभी वो चेहरे खिलते हैं.
दोस्त तो पीछे छूट गया, दुश्मन तो अक्सर मिलते हैं,
घर की खुशियों मैं है दरार, वादों से जिनको सिलते हैं.
खून गिरे जो धरती पे, दुश्मन से डरता ना ही वो,
धरती अपनी महफूज़ सदा जब, सरहद पे खड़ा सिपाही है.

घर से ख़त जो मिले उसे, आँखें उसकी नम होती हैं,
निगेहबान फिर भी है वो, आँखें न उसकी सोती हैं.
होकर शहीद जब घर पहुँचे, सबकी आँखें फिर रोती हैं,
सदियाँ भी क्यों न हों उदास, जब वो संताने खोती हैं.
जो अपने लहू से वतन को सींचे, सरफ़रोश की वो गवाही है
धरती अपनी महफूज़ सदा जब, सरहद पे खड़ा सिपाही है

Saturday, February 19, 2011

उनकी खुशियों पे मरता हूँ


उनके ही हाथों में मैंने,
अपनी दो आँखें खोली थी

साथ में उनके कुछ सपने थे,
और ममता कि झोली थी
उनसे ही थी मेरी दिवाली,
और उनसे ही होली थी
भले ही मुझसे कुछ कहा,
पर आँखों में एक बोली थी
वो मेरे भगवान् हैं और मैं,
उन्ही कि पूजा करता हूँ
उन्ही के सपनो से जिंदा मैं,
उनकी खुशियों पे मरता हूँ

दूर जो घर से मैं जाता हूँ,
वो आँखें नहीं सोती हैं
मैं जब मुश्किल में पड़ जाऊं,
फिर वो आँखें रोती हैं
घर वापस फिर कब आएगा,
उनसे यही बातें होती हैं
उनके सपने साकार करूँ,
यही मैं सोचा करता हूँ
उन्ही के सपनो से जिंदा मैं,
उनकी खुशियों पे मरता हूँ
दूर भले में उनसे हूँ,
पर सपनों से नज़दीक हूँ मैं
साथ जो मेरे उनकी दुआएं,
फिर तो यहाँ पे ठीक हूँ मैं
ख़ुशी तो है मंजिल पाने कि,
साथ में दूरी का है ग़म
उनके ख़त जो मिले मुझे तो,
आँखें मेरी होती हैं नम
किस हाल मैं हैं वो पता नहीं,
उनकी परवाह मैं करता हूँ
उन्ही के सपनो से जिंदा मैं,
उनकी खुशियों पे मरता हूँ