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Thursday, March 19, 2020

General Studies for Exams: SUMAN Scheme

Points to remember.

  1. Surakshit Matritva Aashwasan (Suman) Scheme.
  2. Aims to bring down the maternal and infant mortality  rates (MMR and IMR) in India.
  3. EligibilityAll pregnant women, newborns and mothers up to 6 months of delivery.
  4. Inaugurated by Union Minister for Health & Family Welfare Dr. Harsh Vardhan at 13th Conference of Central Council of Health and Family Welfare (CCHFW).
  5. Benefits: free healthcare to all beneficiaries, respectful care with privacy and dignity. Also it includes, ante natal check-ups, at least one checkup under Pradhan Mantri Surakshit Matritva Abhiyan, Iron Folic Acid supplementation, Tetanus diptheria injection.

Saturday, February 19, 2011

उनकी खुशियों पे मरता हूँ


उनके ही हाथों में मैंने,
अपनी दो आँखें खोली थी

साथ में उनके कुछ सपने थे,
और ममता कि झोली थी
उनसे ही थी मेरी दिवाली,
और उनसे ही होली थी
भले ही मुझसे कुछ कहा,
पर आँखों में एक बोली थी
वो मेरे भगवान् हैं और मैं,
उन्ही कि पूजा करता हूँ
उन्ही के सपनो से जिंदा मैं,
उनकी खुशियों पे मरता हूँ

दूर जो घर से मैं जाता हूँ,
वो आँखें नहीं सोती हैं
मैं जब मुश्किल में पड़ जाऊं,
फिर वो आँखें रोती हैं
घर वापस फिर कब आएगा,
उनसे यही बातें होती हैं
उनके सपने साकार करूँ,
यही मैं सोचा करता हूँ
उन्ही के सपनो से जिंदा मैं,
उनकी खुशियों पे मरता हूँ
दूर भले में उनसे हूँ,
पर सपनों से नज़दीक हूँ मैं
साथ जो मेरे उनकी दुआएं,
फिर तो यहाँ पे ठीक हूँ मैं
ख़ुशी तो है मंजिल पाने कि,
साथ में दूरी का है ग़म
उनके ख़त जो मिले मुझे तो,
आँखें मेरी होती हैं नम
किस हाल मैं हैं वो पता नहीं,
उनकी परवाह मैं करता हूँ
उन्ही के सपनो से जिंदा मैं,
उनकी खुशियों पे मरता हूँ

Monday, December 13, 2010

एक आज़ाद परिंदा हूँ



तिनके सा मेरा ये जहां,
उड़के मैं जाऊं और कहाँ
तू है तो मेरा सब कुछ है
तेरे साए में जिंदा हूँ
इस खुले आसमाँ में जैसे,
एक आज़ाद परिंदा हूँ

तेरे आगे मैं कुछ भी नहीं
दुनिया ये तुझसे चलती है
तेरी दुआएं साथ रहें तो,
मेरी ये खुशियाँ पलती हैं
अपनी हर गुस्ताखी पर
मैं बेहद शर्मिंदा हूँ
इस खुले आसमाँ में जैसे,
एक आज़ाद परिंदा हूँ

शाम के ढलते मैं आ जाऊं
यह मेरी कोशिश रहती है,
अपने पर मैं वहाँ पसारू
जिस ओर हवा ये बहती है ।
लौट के मैं जो न आ पाऊं
तू ऐसे क्यों रोता है,
ऐसे जैसे कि कोई,
अपने किसी को खोता है
बिछड़ के तुझसे मैं तुझे रुलाऊं,
ऐसा न मैं दरिंदा हूँ
इस खुले आसमाँ में जैसे,
एक आज़ाद परिंदा हूँ