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Tuesday, September 11, 2012

ये देश है न जागीर तेरी

कर दे तू खड़ी दीवारों को 
या डाल दे पांवों में ज़ंजीरें
चुनवा दे तू दीवारों में 
फिर भी हम लांघेंगे ये लकीरें 
पहुंचा हूँ मैं मीलों आगे 
जब से थी ये आग़ाज़ मेरी 
दफ़ना भी दे कोसों नीचे 
न थमेगी ये आवाज़ मेरी 

जिंदा हैं जब ये उम्मीदें
फिर टूटेगी ज़ंजीर तेरी
तू रोक मुझे न पायेगा
ये देश है न जागीर तेरी 

इसे खून पसीने से सींचा
आजादी के रखवालों ने
तेरे सोये ईमान को अब
कुरेदा है चंद सवालों ने
अब रोक सके तू कदम मेरे
ऐसी न है औकात तेरी
उम्मीद है मेरी क़ुर्बानी
कभी बनेगी फिर सौग़ात मेरी

इस धरती पर है दिखती
कल की उजली तस्वीर मेरी

इस देश पे मैं क़ुर्बान
ये देश है न जागीर तेरी

Wednesday, August 03, 2011

सरहद पे खड़ा सिपाही है.


सबके मन में खुशहाली है, जब कदम टिके हैं रेतों में,
निगेहबान सरहद पे वो तो, है हरियाली खेतों में.
तिरंगे की वो आन बचाता, आज़ाद हिंद का राही है,
धरती अपनी महफूज़ सदा जब, सरहद पे खड़ा सिपाही है.

बर्फ जमी है धरती पे, फिर भी वो कदम न हिलते हैं,
दुश्मन को जब मार गिराएं, तभी वो चेहरे खिलते हैं.
दोस्त तो पीछे छूट गया, दुश्मन तो अक्सर मिलते हैं,
घर की खुशियों मैं है दरार, वादों से जिनको सिलते हैं.
खून गिरे जो धरती पे, दुश्मन से डरता ना ही वो,
धरती अपनी महफूज़ सदा जब, सरहद पे खड़ा सिपाही है.

घर से ख़त जो मिले उसे, आँखें उसकी नम होती हैं,
निगेहबान फिर भी है वो, आँखें न उसकी सोती हैं.
होकर शहीद जब घर पहुँचे, सबकी आँखें फिर रोती हैं,
सदियाँ भी क्यों न हों उदास, जब वो संताने खोती हैं.
जो अपने लहू से वतन को सींचे, सरफ़रोश की वो गवाही है
धरती अपनी महफूज़ सदा जब, सरहद पे खड़ा सिपाही है

Friday, November 12, 2010

हमें पता है

कहते हैं कि तन मन धन
भारत माता को है अर्पण
कितना सच है ये हमें पता है
कितना सच है ये तुम्हे पता है
हमने देखा एक नया भारत
सन सत्तावन की कुर्बानी में
देश की हमने लाज बचाई
सरहद पे लड़े जवानी में
कहते हैं अब हमपे न
कोई आँख उठाएगा
संसद में बैठा हर कोई
देश की लाज बचाएगा
कितना सच है ये हमें पता है
कितना सच है ये तुम्हे पता है
सबने की वर्षों मेहनत
फिर संविधान बनाया था
विद्वानों ने तब जाकर
ये भ्रष्ट तंत्र दफनाया था
कहते हैं भारत पे हम अब
प्रजा का राज चलाएंगे
देश में साक्षरता और उन्नति
का हम दीप जलाएंगे
कितना सच है ये हमें पता है
कितना सच है ये तुम्हे पता है
आधा पैसा वो खाते हैं
फिर बाकी हम सब पाते हैं
जांच भी बैठे तो ये सारे
साफ़ बरी होके आते हैं
भ्रष्ट सभी यहीं बसते हैं
कहके सब हमपे हसते हैं
कहते हैं की न्याय मिलेगा
प्रयास अभी भी जारी है
बहुत हो गयी तानाशाही
अब प्रजातंत्र की बारी बारी है
कितना सच है ये हमें पता है
कितना सच है ये तुम्हे पता है

तेरा ये पुत्र आभारी है


I love my nation and i express my love and faith in this way.

मेरी वो माँ है जिसका,
हिम जैसा है मस्तक। 
दूर से आती सूरज की किरणें,
उसपे देती हैं दस्तक। 
तू देवी है हर मंदिर की। 
तेरा पुत्र पुजारी है। 
मुझपे फ़ैले तेरे आँचल का,
तेरा ये पुत्र आभारी है। 

पावन गंगा की है सौगंध,
न तुझे कभी रोने देंगे। 
तेरी रक्षा में जाग रहे,
पहरेदारों को न सोने देंगे। 
तेरी जय जयकार करे,
वो शिक्षक या व्यापारी है। 
मुझपे फ़ैले तेरे आँचल का,
तेरा ये पुत्र आभारी है। 

तेरी मिट्टी में हम जन्मे,
हमको इस मिट्टी पे गर्व। 
सजा के तुझको रखेंगे,
हो मेला या कोई पर्व। 
तेरे कहने पे तत्पर हैं, 
ये पुत्र तो आज्ञाकारी है। 
मुझपे फ़ैले तेरे आँचल का,
तेरा ये पुत्र आभारी है। 

तेरे चरणों में शीष झुकाऊं,
तेरी जयजयकार करूँ। 
तेरी रक्षा में अस्त्र उठाऊं,
तेरे ही आँचल में मरूं। 
तुझको हम आज़ाद करेंगे। 
अब ये शपथ हमारी है। 
मुझपे फ़ैले तेरे आँचल का,
तेरा ये पुत्र आभारी है।