Thursday, October 24, 2013

कुछ दूर अभी चलना है मुझे

जब भी ये कदम बढ़ते हैं मेरे
ये वक़्त भी आगे बढ़ता है
जो था सोया सा एक सूरज
फिर आसमान में चढ़ता है
बरसात की जो कुछ बूँदें है
और चकाचौंध  जो किरणे हैं
ये मुझे अब कहती हैं

कि 
कुछ दूर अभी चलना है मुझे  
कुछ दूर अभी चलना है मुझे 

जिस रस्ते पे  चलना था मुझे 
उसके थे निशां मिटे हुए 
जो मंज़िल करनी थी हासिल 
उसके थे लाखों राही दिखे 
अपनी राहें फिर बना लिया 
और चुना एक नया सा कारवां 
पर सही राह तय करने को 

कुछ दूर अभी चलना है मुझे  
कुछ दूर अभी चलना है मुझे 


मैं खड़ा हूँ अब उस मोड़ पे कि 
मेरी हर शक्ति ख़तम हुयी 
पर मुझको इस दूरी से 
दिखती नज़दीक वो मंजिल है 
पर उस तक चलने के लिए 
ताकि उसका दर चूम सकूँ 

कुछ दूर अभी चलना है मुझे  
कुछ दूर अभी चलना है मुझे

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