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Sunday, October 14, 2012

फिर भी उस राह पे चलता हूँ

शायद मैं कहीं भटक रहा था
शायद कहीं और निकल चला था
मैं मीलों आगे पहुँच गया
रस्ता तो मेरा वहीँ खड़ा था 
ठहरा न लम्हा हाथों में 
न वक़्त था कि मैं मुड़ सकूँ 
वापस ढूढुं उस रस्ते को 
जिस रस्ते से फिर जुड़ सकूँ 

फिर भूल के मैं उस मंज़िल को
मैं नयी राह अब चुनता हूँ 
एक नयी राह अब चलता हूँ  

ये सोच के आगे बढ़ा था मैं 
कि न होगी अब हार मेरी
पर आगे थी जो मुश्किलें
उनसे ही थी यलगार  मेरी
उम्मीद जो मन में बाकी थी 
उसने अपनी एक राह चुनी 
मैंने लाख मनाया पर 
फिर भी न उसने मेरी सुनी 
न है हिसाब क्या खोया मैं 
फिर भी उस राह पे चलता हूँ 
फिर भी उस राह पे चलता हूँ 

Monday, May 14, 2012

एक ठहराव जरूरी है


तू रुका है पर टूटा तो नहीं 
था साथ जो कल छूटा तो नहीं  
तेरी कोशिश से खुश हैं सभी 
तुझसे है कोई रूठा तो नहीं 
आगे बढ़ने के लिए भी 
एक ठहराव जरूरी है 
एक ठहराव जरूरी है
रहता नहीं सबकुछ पहले सा 
हर पल भी कभी टिकता ही नहीं 
जो अभी है तारा अम्बर का 
वो सुबह में तो दिखता ही नहीं 
एक नयी सुबह के लिए भी 
एक बदलाव जरूरी है 
एक बदलाव जरूरी है  

हैं मुश्किलें राहों में कई 
तुझे उनसे है लड़ना भी अभी 
रस्ता देखे मंजिल तेरा 
जहां पहुचेगा तू भी तो कभी 
अपनी जीत पाने के लिए  
एक टकराव जरूरी है 
एक टकराव जरूरी है