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Monday, April 29, 2013
Friday, October 12, 2012
Tuesday, November 29, 2011
जब कभी यहाँ अँधेरे हों
We pray fire in every form. Even its the fire in the Sun that guides us. When we worship the God Sun, we worship the fire for its purity.
जो तेरी किरणें पड़ती हैं
तो धरती अपनी है उजली
दूर से ही आकाश दिखे
शाम भी न रहती धुंधली
शाम की घूंघट न रहती
तुझसे जब यहाँ सवेरे हों
तुझसे ही पथ उजियारे हों
जब कभी यहाँ अँधेरे हों
तुझसे जलती दीपक अपनी
जब कभी यहाँ अंधियारा हो
गर्व हो सूरज को तुझसे
तुझसे रौशन घर सारा है
सबके चूल्हे जलते तुझसे
तुझसे मंडप में फेरे हों
तुझसे ही पथ उजियारे हों
जब कभी यहाँ अँधेरे हों
तुझको नहीं कोई छू पाए
तेरा कोई आकार नहीं
तू तो है अनमोल सदा
तेरा कोई व्यापार नहीं
तुझसे धरती पे अन्न उगे
जब कभी ये बादल घेरे हों
तुझसे ही पथ उजियारे हों
जब कभी यहाँ अँधेरे हों
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