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Tuesday, April 26, 2016

हारेगा नहीं तू इस युग में

कुछ सिक्कों की खनक में जब
कुछ सफ़ेदपोश बईमान हुए,
अपनी जेबें भरने के लिए
किस हद तक वे ऐसे नादान हुए,
जब नए सुबह की उम्मीदों के
ओझल सारे अरमान हुए,
है इंसानियत का चेहरा क्या,
इस बात सब अंजान हुए,

एक तू ही था जिसे थी फ़िकर
आने वाली सदियों के लिए।

क्यों डरता है कि अकेला ही
क्या अपनी मंज़िल पाएगा !
है तूने जो आग़ाज़ किया,
तूफानों से लड़ जाएगा।
तेरे ही बदौलत है बची
हम सब में कुछ उम्मीदें हैं।
हैं सब की सदाएं संग तेरे
हर किले को फतह कर जाएगा।

लेकर फिर सुबह का उजियारा
अध्याय रचेगा कलियुग में।
टूटेगा नहीं तू इस युग में।
हारेगा नहीं तू इस युग में।


Sunday, December 22, 2013

तू तो योद्धा है सदियों का

पहला जो कदम था युद्ध में तेरा,
न थी दुश्मन के वार की आहट।
फ़िर भी तूने अपने दम पे,
दी उसको एक कड़ी चुनौती।
जो हाथ से छूटे युद्ध ये तेरे,
क़ाबिलियत की है एक और कसौटी।

हैं ज़ख्म तेरे अभी भरे नहीं।
पर तू अभी तो टूटा ही नहीं।
तू तो योद्धा है सदियों का
तेरी अगली कसौटी है यही।


तेरी हार को दुश्मन ने माना 
कि ये तेरी कमजोरी है। 
इसलिए तेरी गलतियों को भाँपे,
उसने कोई राह न छोड़ी है। 
तू हौसले को कर बुलंद 
और फ़िर से अपनी राह चुन। 
जो गूँज है तेरे ख़िलाफ़ 
अनसुनी कर ऐसी हर धुन। 

जो कदम हैं आगे को बढ़े,
फ़िर न आगे कोई सोच अड़े। 
तू तो योद्धा है सदियों का,
जो अधर्म के विपरीत लड़े। 

बीती हुयी अपनी ग़लती को 
तू भूल के आगे चल निकला। 
क्या बात है तेरी मेहनत से
अब तो हर पत्थर है पिघला !
पर तेरी रफ़्तार से अब 
एक लहर है ऐसी फ़ैल गयी 
कि तेरे हर दुश्मन ने 
फ़िर तुझको ललकारा है। 

आगे क्या है अंजाम तेरा 
क्यों तू परवाह करता उसकी ? 
तू तो योद्धा है सदियों का 
हर सदी में एक पहचान है जिसकी।