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Wednesday, March 28, 2012

एक तू ही है मेरा हमसफ़र - to my life

 गिरते संभलते
यूं ही चलते चलते 
तूने है जीना सिखा दिया 
राहों में मेरे 
थे जब भी अँधेरे 
तूने है रस्ता दिखा दिया 
एक तू ही है मेरा हमसफ़र 
एक तू ही है मेरा हमसफ़र 

चलने से पहले पूछा जो खुद से 
क्यों है तू अकेला राहों में  
फिर तेरी पनाहें मुझे मिली  
तूने है थामा फिर बाहों में 
मुश्किलों का जैसे है एक समंदर 
न दिखता है मुझे अब किनारा 
बस एक तुझपे है मुझे भरोसा 
बस एक तेरा ही है सहारा 
तुझको मैं चाहूँ हर एक सहर 
एक तू ही है मेरा हमसफ़र

Saturday, February 05, 2011

इसी बात से डरता है

मुझको अब किस ओर है जाना
ये कुछ नहीं समझता है
जब कोई मुश्किल आये तो,
दिल ये मेरा उलझता है
रास्ते तो कई हैं लेकिन
मंज़िल कि कुछ पहचान नहीं
उन्ही रास्तों पे चलना है
और कोई अरमान नहीं
ये दिल है नादान मेरा,
हर बार ये गलती करता है
फिर ये गलती न कर बैठे
इसी बात से डरता है।

खुला आसमा देख के इसने
ख्वाहिश राखी है उड़ने की
देख के सबको साथ में उड़ते
उनसे कोशिश है जुड़ने की
आसमा कि थाह नहीं
इस बात से ये अनजाना है
थक के वापस फिर आएगा
दिल को ये समझाना है
फिर से ख्वाहिश न कर बैठे
यही तो ख्वाहिश करता है
फिर ये गलती न कर बैठे
इसी बात से डरता है।

Monday, November 15, 2010

क्रांति की गूँज

The poem is a voice to all the young people of India, which asks them to resurrect the feeling of sacrifice and revolution.
अपनी धरती आज़ाद है और
हम आज़ाद मुल्क़ के वासी हैं। 
अपने दिल में फ़िर क्यों पलती,
एक ग़म और उदासी है। 

 कहाँ गयी वो सोच जिसे, 
हम आधारशिला कहलाते थे?
एक नयी सुबह की देख झलकियां,
अपना मन बहलाते थे। 
कहते थे कि लड़ जायेंगे,
वो अस्सी या इक्यासी हैं। 
क्रांति की धार को जंग न लगने देना। 
ये तेरा हथियार है रही। 
तोड़ दे इस चक्रव्यूह को,
ये क्रांति की गूँज है सिपाही। 
इस भ्रष्ट तंत्र से मुक्ति पाने को,
कुछ और भी सदियां प्यासी हैं।