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Saturday, October 25, 2025
एक अभियोजक
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न्याय की जब भी हो गुहार, अदालत में उठी उसकी पुकार। देकर दलीलें बेशुमार, अभियुक्त पे करता है प्रहार। बुझने नहीं दी उम्मीद की लौ पीड़ित के क...
Saturday, October 18, 2025
देस तभी लौटूँगा
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जब यूँ लगे कि मुकाम मिला, काबिलियत का काम मिला, मेहनत का भी अंजाम मिला, ख़ुद से बना एक नाम मिला। देस तभी लौटूँगा। देस तभी लौटूँगा। कुछ चेहरे...
Saturday, May 11, 2024
शायद अगली तारीख़ पर
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कुछ तीस बरस पहले यूँ हुआ, ग़बन का झूठा इल्ज़ाम लगा। खेल था कुछ सफ़ेदपोशों का, उसका बेमतलब नाम लगा। खो बैठा वो अपना सब-कुछ, सबकी नज़रों से उतर...
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Wednesday, October 25, 2023
मन मेरा यूं करता है
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मन मेरा यूं करता है, मैं हवा से अब तो बात करूँ तेरे संग दिन को रात करूँ पथरीली मुश्किल राहों को तेरे कदमों से आघात करूँ। मन मेरा यूं करता ह...
2 comments:
Tuesday, January 03, 2023
वो वीर सपूत थे भारत के
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पश्चिम का ही परचम था। उम्मीद का दीपक मद्धम था। जो गीत रचे नए कल के आज़ादी का ही सरगम था। ख़ुदगर्ज़ नहीं वो रहा कभी, जब आहुति देनी पड़ी। अपने...
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